
मीरा की आँखों में एक माहिर की सी चाहत चमक रही थी; वह और करीब झुकी, उसकी गर्म साँसें आरव के कान के पास फुसफुसाहट बनकर महसूस हुईं। उसका हाथ अभी भी आरव के अंग पर था और धीरे-धीरे सहला रहा था; उसकी उंगलियाँ उसके अंग के ऊपरी हिस्से और सिरे को छेड़ रही थीं, और उसके अंडकोष को कसने वाली पिछली हरकत की गर्माहट अभी भी आरव की रगों में दौड़ रही थी। उसने आरव का हाथ अपनी योनि के और अंदर पहुँचाया; उसकी तर्जनी और मध्यमा उंगलियाँ अंदर धंस गईं और उसकी लय के साथ चलने लगीं। जांघों के कांपने के साथ-साथ, अंदर की चिकनी गर्माहट ने आरव को जकड़ लिया। लेकिन मीरा की इच्छा और तेज़ हो गई, उसकी आवाज़ में एक कामुक गूंज थी। "मैं चाहती हूँ कि तुम अपनी ज़बान मेरी योनि पर लगाओ, डार्लिंग," वह चाहत भरी चमकती आँखों से फुसफुसाई। "वहाँ तुम्हारी ज़बान का एहसास चाहती हूँ।"











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